श्री जिनकुशलसूरि गुरु दादावाड़ी

आस्था, साधना और गुरु परंपरा का पावन केंद्र

श्री जिनकुशलसूरि गुरु दादावाड़ी

आस्था, साधना और गुरु परंपरा का पावन केंद्र

श्री जिनकुशलसूरि गुरु दादावाड़ी जैन धर्म की खरतरगच्छ परंपरा से जुड़े दादा गुरुदेव श्री जिनकुशलसूरिजी को समर्पित एक पावन धार्मिक स्थल है। यह दादावाड़ी नागेश्वर, उन्हेल क्षेत्र में स्थित है और लगभग पाँच दशकों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रही है।

प.पू. श्री चंद्रप्रभा श्रीजी महाराज साहब की प्रेरणा से इस दादावाड़ी की स्थापना व विकास हुआ। परिसर में दादा गुरुदेव श्री जिनकुशलसूरिजी की प्रतिमा के साथ श्री सीमंधर स्वामी की प्रतिमा भी विराजमान है। श्री सीमंधर स्वामी की पुनः प्रतिष्ठा वर्ष 2022 में हुई।

सुविधा एवं आवास

दादावाड़ी धर्मशालाएँ

दो धर्मशालाएँ | वातानुकूलित कक्ष | शांत एवं सुविधाजनक आवास

दादावाड़ी परिसर में श्रद्धालुओं एवं यात्रियों के ठहरने के लिए दो धर्मशालाओं की सुविधा उपलब्ध है। दोनों धर्मशालाओं में वातानुकूलित (AC) कक्षउपलब्ध हैं।

धर्मशाला - 2 (विचक्षण चन्द्र भवन)

धर्मशाला - 1

उत्कृष्ट यात्री निवास

श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ, शांत, हवादार एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त वातानुकूलित (AC) व नॉन-AC कमरे उपलब्ध।

सुविधायुक्त परिसर

बुजुर्गों व श्रद्धालुओं की सुगमता हेतु स्मूथ लिफ्ट, गीजर, शुद्ध जल, सुरक्षित परिसर एवं विशाल वाहन पार्किंग सुविधा।

पावन दादावाड़ी

दादा गुरुदेव श्री जिनकुशलसूरिजी एवं श्री सीमंधर स्वामी भगवान के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करें।

अग्रिम आवास पूछताछ

यात्रा से पूर्व कमरों की उपलब्धता, ठहरने के नियम एवं जानकारी हेतु हमारी प्रबंधन समिति से संपर्क करें।

परिचय एवं इतिहास

श्री जिनकुशलसूरि गुरु दादावाड़ी

1982

प्रतिमा प्रतिष्ठा वर्ष

उन्हेल (नागेश्वर), जिला झालावाड़, राजस्थान में स्थित श्री जिनकुशलसूरि गुरु दादावाड़ी, दादा गुरुदेव श्री जिनकुशलसूरिजी की पावन स्मृति एवं आराधना से जुड़ा धार्मिक स्थल है।

यह दादावाड़ी लगभग 50 वर्षों से जैन श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र रही है। प.पू. श्री चंद्रप्रभा श्रीजी महाराज साहब की प्रेरणा से दादावाड़ी की स्थापना तथा प्रतिमा प्रतिष्ठा का मंगल कार्य संपन्न हुआ था।

“उपलब्ध पुराने जैन साहित्य में इस दादावाड़ी का उल्लेख ‘श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छाचार्य श्री जिनकुशलसूरि दादावाड़ी ट्रस्ट, उन्हेल (नागेश्वर)’ के रूप में मिलता है।”

यहाँ दादा श्री जिनकुशलसूरिजी की भव्य खड़ी प्रतिमा की प्रतिष्ठा वर्ष 1982 में प.पू. श्री चंद्रप्रभा श्रीजी महाराज साहब की प्रेरणा व मंगल सानिध्य में हुई थी। दूर-दूर से श्रद्धालु दादा गुरुदेव के दर्शन व आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु यहाँ पधारते हैं।

दर्शन एवं झलकियाँ

दादावाड़ी दर्शन

दादावाड़ी परिसर में श्रद्धालुओं एवं यात्रियों के ठहरने के लिए दो धर्मशालाओं की सुविधा उपलब्ध है। दोनों धर्मशालाओं में वातानुकूलित (AC) कक्षउपलब्ध हैं।

दर्शन एवं झलकियाँ

दादावाड़ी के दर्शन (वीडियो)

दादावाड़ी परिसर, मुख्य मंदिर, दादा गुरुदेव प्रतिमा एवं धर्मशाला की दिव्य झलकियाँ देखने के लिए वीडियो देखें।

सामान्य जिज्ञासाएं

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

दादावाड़ी एवं धर्मशाला परिसर में आवास, आरक्षण और नियमों से जुड़े आपके सभी सवालों के त्वरित उत्तर।

जी हाँ, आप हमारी वेबसाइट पर दिए गए इंक्वायरी फॉर्म के माध्यम से या दिए गए संपर्क नंबर पर कॉल करके अपनी तिथि एवं कमरों की आवश्यकता के अनुसार अग्रिम बुकिंग करा सकते हैं।

सामान्यतः चेक-इन और चेक-आउट का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच रहता है। यदि आप असमय (Early/Late) आते हैं, तो उपलब्धता के आधार पर सहयोग किया जाएगा।

सभी वयस्क यात्रियों के लिए सरकार द्वारा जारी मूल पहचान पत्र (आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, या ड्राइविंग लाइसेंस) प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

जी हाँ, परिसर में सभी मंजिलों तक पहुँचने के लिए लिफ्ट और रैम्प की उचित व्यवस्था है।

जी हाँ, श्रद्धालुओं और यात्रियों के निजी वाहनों (कार/बस) के लिए परिसर के अंदर सुरक्षित और नि:शुल्क पार्किंग व्यवस्था उपलब्ध है।

यदि आपकी यात्रा की योजना बदलती है, तो कृपया कम से कम 24 घंटे पूर्व प्रबंधन (Management) को सूचित करें ताकि कमरा अन्य श्रद्धालुओं को आवंटित किया जा सके।

वर्तमान तीर्थंकर श्री सीमंधर स्वामी

दादावाड़ी परिसर के ऊपरी भाग में भगवान श्री सीमंधर स्वामी की अत्यंत ही भव्य एवं अलौकिक प्रतिमा विराजमान है।

1. ऊपरी जिनालय की वास्तुकला

दादावाड़ी मंदिर के प्रथम तल पर स्थित यह जिनालय नक्काशीदार संगमरमर के स्तम्भों, सुंदर तोरणों और भव्य शिखर से सुसज्जित है। इसका शांत एवं आध्यात्मिक वातावरण भक्तों को प्रभु भक्ति में एकाग्र करता है।

2. दैनिक पूजा व स्नात्र महोत्सव

प्रतिदिन प्रातः प्रभु सीमंधर स्वामी का केसर-चन्दन प्रक्षाल, स्नात्र पूजा और अष्टप्रकारी पूजा की जाती है। सायंकाल संगीतमय आरती एवं मंगल दीपक का आयोजन होता है।

3. मनोकामना व मोक्ष साधना

विहरमाण तीर्थंकर के दर्शन और आराधना को आध्यात्मिक रूप से विशेष माना जाता है। उन्हेल दादावाड़ी आने वाले श्रद्धालु यहाँ ध्यान, स्तुति और भक्ति के माध्यम से आत्मिक शांति की अनुभूति करते हैं।

श्री सीमंधर स्वामी
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